जानें प्रेगनेंट होने के 14 शुरूआती लक्षण इन फर्स्ट वीक इन हिंदी।

प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) के पहले सप्ताह में दिखने वाले लक्षण | pregnancy (garbhavastha) ke lakshan in first week in hindi - गर्भधारण का सुखद अहसास एक गर्भवती महिला ही समझ सकती है।
गर्भावस्था के दौरान हर महिला को कई तरह के बदलावों से होकर गुजरना पड़ता है।

जिनमे से कुछ बदलाव महिलाओं में बेहद सुखमय होते हैं। और कुछ बदलाव उनके व्यवहार और शरीर के लिए आपत्तिप्रद होते हैं।
इस दौरान होने वाले इन बदलावों की वजह से कई बार कुछ महिलाओं में मानसिक रूप अग्रेसिवनेस आ जाती है।
साथ ही कुछ महिलाएं आनंद विभोर रहती हैं।

अगर गर्भधारण के शुरुआती लक्षणों की बात की जाए तो यह कहना सही होगा कि इस दौरान दिखने वाले लक्षण सभी महिलाओं में समान नहीं होते।
कई बार कुछ महिलाओं में ये लक्षण अन्य कारणों की वजह से भी पैदा हो सकते हैं।
Pregnancy ke lakshan in first week in hindi.
Pregnancy ke lakshan.
एक सर्वे के आधार पर कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में केवल पीरियड्स का मिस होना ही देखा गया।
लेकिन कुछ महिलाओं में पीरियड्स मिस होने से पहले गर्भावस्था का अहसास, जी मिचलाना, घबराहट आदि लक्षण देखने को मिले।
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आमतौर पर देखा जाए तो प्रेग्नेंसी के पहले सप्ताह में बाहरी रूप से किसी प्रकार का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता।
क्योंकि पहले सप्ताह में गर्भ की शुरुआत होती है। उसमे किसी प्रकार का कोई डेवलपमेंट नहीं होता है।
लेकिन गर्भावस्था के फर्स्ट वीक में आंतरिक रूप से महिलाओं में कई तरह के चेंजेज होते हैं।
जिनमें मुख्यत महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होना है।
गर्भावस्था की आशंका होने की स्थति में अपने डॉक्टर से जरूरी जांच करवाएं। या घर पर ही प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की सहायता से जांच करें।
इस पोस्ट के अंदर हम बात करने वाले हैं, उन सभी लक्षणों की, जो प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं में गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में दिखाई देते हैं।

    गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) के पहले सप्ताह में दिखने वाले लक्षण pregnancy ke lakshan in first week in hindi -


    यह बात सच है कि गर्भावस्था के फर्स्ट वीक या शुरुआती दिनों में महिलाओं के कई सारे बदलाव देखने को मिलते हैं।
    लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी महिलाओं में नीचे बताए गए सभी लक्षण दिखाई दें।
    हो सकता है, गर्भधारण की स्थति में कुछ महिलाओं इनके अतिरिक्त भी कोई लक्षण नजर आए।
    अतः अपनी गर्भावस्था को सुनिश्चित या पूरा जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें। या प्रेग्नेंसी टेस्ट किट का इस्तेमाल करें।
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    प्रेग्नेंसी के लक्षण इन फर्स्ट वीक इन हिंदी -

    हार्मोनल बदलाव -

    प्रेग्नेंसी या गर्भावस्था के फर्स्ट वीक में अधिकतर महिलाओं में बाहरी रूप से कोई लक्षण नजर नहीं आता।
    लेकिन आतंरिक रूप से उनमें कुछ बदलाव होते हैं। जो गर्भावस्था को स्थापित करने और बनाए रखने के लिए अपनी अहम भूमिका का निर्वाह करते हैं।
    महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ही महिला के शरीर गर्भ का स्थापन और विकाश होता है।
    लेकिन कई बार कुछ महिलाओं को इन्हीं हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भधारण के शुरुआती दिनों में कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।
    ये समस्याएं एक प्रकार से स्वाभाविक हो सकती हैं।

    व्यवहार में बदलाव -

    कई बार कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में हार्मोनल बदलाव के कारण व्यवहार में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।
    कुछ महिलाएं गर्भधारण को लेकर उत्सुक रहती हैं। उनका मिजाज आनंदित रहता है।
    बाकी कुछ महिलाओं में होने वाले आंतरिक बदलावों के कारण व्यवहार चिड़चिड़ा हो सकता है।
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    Pregnancy ke 14 lakshan in first week in hindi.
    Pregnancy ke lakshan.
    गर्भ का अहसास -

    सर्वे में पाया गया कि 20% महिलाओं को प्रेग्नेंसी के कुछ ही दिनों बाद या पहले सप्ताह में उन्हें अपनी गर्भावस्था का अहसास होने लग गया था।
    लेकिन कुछ महिलाओं में माहवारी की अगली तिथि तक पता ही नही था कि वे गर्भवती हैं।
    महिलाओं में गर्भावस्था का यह अहसास उनके शरीर मे होने वाले आंतरिक बदलावों के कारण ही पैदा होता है।
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    मुंह में कसैलापन -

    गर्भधारण की वजह से होने वाले आंतरिक बदलाव महिला के मुंह का स्वाद बदल देते हैं।
    मुंह में कसैलापन रहना, भोजन में अरुचि, खट्टा खाने का मन होना आदि बदलाव प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में देखे गए हैं।

    अधिक भूख लगना -

    कुछ महिलाओं में गर्भधारण के बाद भूख अधिक लगना शुरू हो जाती है।
    ऐसा गर्भावस्था की तिमाही से लेकर अंत तक भी रह सकता है।
    क्योंकि गर्भावस्था में महिला को अपने शरीर के अतिरिक्त अपने गर्भ को पोषण देना होता है।
    गर्भावस्था में भूख का अधिक लगना यह लगभग सभी महिलाओं में स्वाभाविक हो सकता है।
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    उबाक या उल्टियां आना -

    गर्भधारण के बाद महिलाओं को मितली आना या उल्टियां होना एक प्रकार से स्वाभाविक ही है।
    ऐसा अधिकतर महिलाओं में होता है। यह स्थति गर्भावस्था की दूमाही या तिमाही के बाद होती है।
    ऐसा कुछ महिलाओं में सुबह के समय अधिक देखने को मिलता है। उन्हें खाली पेट मितली और उल्टी की समस्या होती है।
    ये सब गर्भधारण को लेकर हुए आंतरिक बदलावों के कारण ही होता है।
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    गैस और कब्ज की शिकायत होना -

    गर्भ की उपापचय क्रिया, मलमूत्र और महिला के कमजोर पाचन के कारण अक्सर गैस और कब्ज की शिकायत बनी रहती है।
    जिनकी वजह से सीने में जलन, सिर दर्द और चिड़चिड़ापन बना रहता है।
    यह समस्या गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से लेकर अंत तक रह सकती है।
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    माहवारी न आना -

    जब महिला गर्भवती हो जाती है, तब यह निश्चित हो जाता है कि उसे अगली तिथि पर माहवारी नहीं होगी।
    यह स्थति महिलाओं में डिलेवरी के बाद भी तब तक रहती है जब तक वह अपने बच्चे को स्तनपान कराती है।
    अधिकतर महिलाओं को पीरियड्स ना आने पर ही पता चलता है कि वह प्रेगनेंट है।
    लेकिन कई बार कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के अतिरिक्त किन्हीं कारणों की वजह से पीरियड्स आने में देरी भी हो जाती है।

    बार बार पिशाब का आना -

    पिशाब का बार बार आना प्रेग्नेंसी का एक बड़ा लक्षण हो सकता है।
    लेकिन कई बार यह स्थति अन्य कारणों की वजह से भी पैदा हो सकती है।
    गर्भधारण के समय होने वाले आंतरिक बदलाव और गर्भ के विकास के लिए महिलाओं में पेल्विक एरिया का रक्त संचरण बढ़ जाता है।
    जिनकी वजह से किडनियों को अधिक रक्त का निष्यंदन करना होता है।
    इस कारण गर्भावस्था में महिलाओं को पिशाब बार बार आने की शिकायत रहती है।
    यह स्थति शुरुआती दिनों से लेकर अंत तक रह सकती है।
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    स्तनों के आकार में बदलाव -

    स्तनों में हल्का दर्द या भारीपन प्रेग्नेंसी का एक बड़ा लक्षण हो सकता है।
    लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि स्तनों में भारीपन केवल गर्भावस्था के कारण ही हो।
    गर्भधारण के शुरुआती दिनों में महिलाओं को इस स्थति का सामना करना पड़ सकता है।
    यह स्थति प्रेग्नेंसी के कारण हो रहे होर्मनल और शारीरिक बदलावों के कारण बन सकती है।

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    हल्का सिर दर्द रहना -

    सिर में हल्का भारीपन या दर्द रहना गर्भावस्था का लक्षण हो सकता है।
    लेकिन यह समस्या अन्य कारणों की वजह से भी हो सकती है।
    महिलाओं में गर्भधारण के बाद यह समस्या कब्ज और गैस के कारण बनती है।
    या फिर सिर दर्द के लिए महिला के शरीर में होने वाले बदलाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
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    शरीर में थकान होना -


    बहुत सी महिलाओं में गर्भधारण के बाद थोड़े से काम के बाद थकान, सीढ़ियां चढ़ने पर सांसों का फूलना एक आम समस्या बन जाती है।
    और यह स्थति डिलेवरी तक बढ़ती ही जाती है।
    क्योंकि महिला को अपने शरीर के अतिरिक्त अपने गर्भ के लिए भी पर्याप्त ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
    जिसके कारण श्वसन दर में तेजी आती है।

    शरीर में अकड़न और दर्द -

    गर्भधारण के बाद कुछ महिलाओं को पीठ दर्द, शरीर के निचले हिस्सों में जकड़न रहना आदि का सामना करना पड़ता है। ऐसा महिलाओं में गर्भावस्था के कारण भी हो सकता है।
    गर्भधारण के बाद महिलाओं में बच्चे के विकाश के लिए पेल्विक एरिया का प्रसार होता है।
    इसी कारण वहां की पेशियों में खींचाव और दर्द का अहसास होता है।
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    वजन बढ़ना -

    गर्भवती महिला में वजन बढ़ना स्वाभाविक हो सकता है। ऐसा सभी महिलाओं के साथ होता है।
    वजन बढ़ने की प्रक्रिया तिमाही के बाद से शुरू हो जाती है।
    जिस प्रकार गर्भ का विकाश होता रहता है, उसी तरह महिला के वजन में वृद्धि होती जाती है।
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    गर्भावस्था के लिए किस प्रकार की सावधानियां बरतें -

    1. अगर आपको शुरुआती लक्षणों के आधार पर लगता है कि आप प्रेगनेंट हैं, तो इस स्थति में सबसे पहले अपनी प्रेग्नेंसी सुनिश्चित करें। 
    2. प्रेग्नेंसी सुनिश्चित होने के बाद अपने चिकित्सक से जरूरी परामर्श लें, उन्हें अपनी दिनचर्या और खाने पीने की सभी आदतों के संदर्भ में खुल कर बताएं और जरूरी सलाह लें।
    3. अगर आप धूम्रपान या किन्हीं नशीले पदार्थों का सेवन करती हैं तो उनका कतई इस्तेमाल ना करें। ये सब आपके गर्भ के लिए जहर के समान है। 
    4. गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से ही हल्का योग और प्राणायाम करें। 
    5. समय पर सोएं तथा समय पर उठें। 
    6. साथ ही अपने शरीर को ऊर्जावान रखें। 
    7. अधिक वजन ना उठाए और ना ही किसी प्रकार की कोई भारी कसरत करें। 
    8. अपने खानपान में पोषक तत्वों का अच्छा मिश्रण रखें। 
    9. कभी भी फ्रिज में रखे बासी और ठंडे भोजन का इस्तेमाल ना करें। 
    10. उछल कूद और भागदौड़ वाले काम बिल्कुल ना करें। 
    11. कभी भी गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल ना करें।
    अगर आप चाहती हैं कि गर्भ में पल रहे शिशु का स्वस्थ हमेशा अच्छा रहे, आपकी गर्भावस्था बेहतर हो।
    तो इसके लिए आपको इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखना होगा।
    ताकि बच्चे का सर्वांगीण विकास हो और वह पूरी तरह चुस्त और दुरुस्त रहे।
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