अनुलोम विलोम कैसे करे विधि | anulom vilom in hindi | Anulom vilom ke benefits/fayde.

अनुलोम विलोम कैसे करे विधि | anulom vilom in hindi | Anulom vilom ke benefits/fayde - वेलकम फ्रेंड्स अगर आपको तलाश है कि अनुलोम विलोम कैसे करे सही विधि क्या है, Anulom vilom ke benefits/fayde, anulom vilom in hindi, तो आप बिलकुल सही जगह पर हो क्योंकि यहाँ आपको मिलेगा सब कुछ जो आप चाहते हो।
अगर सरल भाषा में बात की जाए तो अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ होता है उल्टा, इसके नाम की भांति यह प्राणायाम भी सीधा और उल्टा किया जाता है यानी नाक के एक छिद्र से सांस अंदर लिया जाता है और दूसरे छिद्र से छोड़ा जाता है।
अनुलोम विलोम कैसे करे विधि | anulom vilom in hindi | Anulom vilom ke benefits/fayde.
अनुलोम विलोम प्राणायाम हमारे लिए अनेकों तरह से फायदेमंद है, बस जरूरत है सिर्फ इस प्राणायाम के बारे में थोड़ी जानकारी की।
(और पढ़ें - भस्त्रिका प्राणायाम की सही विधि और फायदे)
देखिए हर प्राणायाम और योग को करने का सही तरीका होता है, सही समय होता है और सही स्थति होती है बस जरूरत है उसे जानने की, आज इस लेख के माध्यम से हम आपको इस प्राणायाम के संदर्भ में पूरी जानकारी देंगे जिसे पढ़ कर कोई भी व्यक्ति अनुलोम विलोम को सहज भाव से कर सकता है।

यहां हम बात करेंगे - Anulom vilom pranayam kaise kare, Anulom vilom in hindi, Anulom vilom ke benefits/fayde, Anulom vilom side effects in hindi.

अनुलोम विलोम कैसे करे विधि | anulom vilom in hindi | Anulom vilom ke benefits/fayde.

अनुलोम विलोम कैसे करे विधि {Anulom vilom pranayam kaise kare} -

  1. इस प्राणायाम को करने लिए सुबह का समय और खाली पेट होना बेहद जरूरी है।
  2. अगर आप रात के समय इस प्राणायाम को करते हो तो यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपने 4 - 5 पहले से कुछ भी नहीं खाया है।
  3. प्राणायाम करने के लिए आप अपनी सुविधानुसार किसी भी आसान का चुनाव कर सकते हो जो आपके लिए सूटेबल हो। चाहे वह पद्मासन हो या सिद्धासन या फिर सुखासन। (और पढ़ें - हाई बीपी  पक्का इलाज)
  4. सिर तना हुआ, शरीर सीधा, हाथ घुटनों पर, आंखे बंद, और मन शांत हो।
  5. इस स्थति में 15 से 30 सेकेंड रहें और फिर प्राणायाम शुरू करें।
  6. इसके लिए आपका बायां हाथ घुटनों पर ही हो और दाहिना हाथ अपनी नाक के ऊपर रखें।
  7. दाहिने हाथ की पहली उंगली मुड़ी हुई हो और अंगूठा और बाकी की उंगलियां खुली हो।
  8. सर्वप्रथम सांस लेना नाक के बाए छिद्र से शुरू करें, इस समय अंगूठे की सहायता से नाक का दाहिना छिद्र बंद हो।
  9. 3 से 5 सेकेंड बाद नाक के दाहिने छिद्र से अंगूठा हटा कर बीच वाली उंगली की सहायता से नाक का बायां छिद्र बंद करके सांस छोड़ दें इस समय बायां छिद्र बंद व दायां खुला हो।
  10. इसी तरह दूसरी बार नाक के बाएं छिद्र को बंद रखें और दाएं छिद्र से सांस लें और 4 से 5 सेकेंड बाद दाएं छिद्र को बंद कर बाएं छिद्र से छोड़ दें।
    एक बार में यह प्रक्रिया 15 से 20 बार दोहराएं।
  11. सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया निरंतर होनी चाहिए।
  12. अगर आप तेजी से यह प्राणायाम करते हो तो जिस गति से सांस लें उसी गति से छोड़ दें।
  13. सांस लेते समय अपने फेफड़ों को हवा से पूरी तरह भर लें, और छोड़ें तो पूरी तरह खाली कर दें।
  14. अपने अंदर सांस अधिक से अधिक देर तक रोकने की कोशिश करें।
  15. इस प्राणायाम की शुरुआत और अंत हमेशा नाक के बाएं छिद्र से ही करें। (और पढ़ें - हेपेटाइटिस का स्थाई इलाज)

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे {Anulom vilom ke benefits/fayde} -

यह प्राणायाम हमारे लिए अनेक तरह से फायदेमंद है अगर आप अपनी दिनचर्या में इस प्राणायाम को रखते हो तो आप सोच भी नहीं सकते यह आपमें आ सकने वाली कितनी ही बीमारियों को रोक सकता है। यह प्राणायाम नीचे बताई गई सभी समस्याओं को दूर करने के लिए अपनी अहम भूमिका का निर्वाह करता है। अतः इसे जरूर अपनाएं -

उच्च रक्तचाप के लिए -

अनुलोम विलोम उच्च रक्तचाप का काल कहे जाने वाला प्राणायाम है। अगर आप उच्च रक्तचाप से ग्रसित हो तो यह प्राणायाम जरूर करें, क्योंकि इससे आप जो दवा ग्रहण कर रहे हो उसका असर भी तेजी से होता है साथ की यह इसे जड़ से खत्म करने का भी काम करता है।
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आंखों के लिए -

इस प्राणायाम को करने वाले व्यक्ति में कभी आंखों की समस्याएं पैदा नहीं होती, आज के समय में अनेकों तरह मोबाइल लैपटॉप और अन्य इसी तरह के उपकरणों से आखों का खराब होना और चश्मा लग जाना सामान्य सी बात है, लेकिन कोई भी व्यक्ति या विद्यार्थी इस प्राणायाम को रोज करता है तो उसमें आंखों से जुड़ी कोई भी समस्या पास भी नहीं फटकेगी।

यादाश्त दुरुस्त करने के लिए -

जैसा कि हमने उपाय बताया यह प्राणायाम विद्यार्थियों के लिए बहुत जरूरी है। जो आंखे तेज रखने के साथ साथ यादाश्त को भी मजबूती देता है। यदि आप भूलने की समस्या से परेशान हो तो यह आपके लिए बहुत ही अच्छा प्राणायाम है।
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अस्थमा के लिए -

अस्थमा के मरीजों के लिए भी इस प्राणायाम को बेहद फायदेमंद बताया है, लेकिन अस्थमा में जब भी आप इस प्राणायाम को करें तो सामान्य ही करें और अपने सांस को अधिक देर तक रोकने प्रयास ना करें।

नाड़ी शोधन के लिए -

अनुलोम विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहा जाता है, यह हमारी सभी नदियों के प्रवाह की शुद्धि का काम करता है।
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पाचन क्रिया में सुधार के लिए -

यह प्राणायाम आपमें कभी पाचन संबंधी कोई भी दिक्कड़ पैदा होने नहीं देगा, आप जो खाओगे वह आपके शरीर को लगेगा। यह प्राणायाम आपकी पाचन प्रक्रिया को बेहतर करता है जिससे उपापचयन की क्रिया में वृद्धि होती है, आंतों को मजबूती मिलती है।

कफ और वात रोगों के लिए -

कफ और वात रोग में आप किसी भी दवा का प्रयोग करने कि बजाय इस प्राणायाम को करें। लगातार कुछ दिनों का प्रयोग वात और कफ जड़ से सफाया कर देगा।

कैंसर के लिए -

अगर कोई भी व्यक्ति रोज अनुलोम विलोम प्राणायाम को सहजता से करता है, तो उसमें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की संभावनाएं बहुत अधिक कम हो जाती हैं।
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फेफड़े मजबूत बनाए के लिए -

यह प्राणायाम फेफड़ों को चुस्त और दुरुस्त बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका का भली भांति निर्वाह करता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें यह प्राणायाम जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह आपकी धूम्रपान की लत से भी लड़ने में मदद करेगा और आपके फेफड़ों को भी स्वच्छ रखेगा।

शरीर की शुद्धि के लिए -

इस प्राणायाम को रोज अपनी दिनचर्या उतारने से आपके शरीर सभी विषाक्त पदार्थ बाहर निकाल जाते हैं।

रक्त परिसंचरण के लिए -

यह प्राणायाम रक्त के परिसंचार यानी प्रवाह को सही स्थति बनाए रखता है जिससे आप उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप जैसी बीमारियों को आसानी से खत्म कर सकते हो।
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चर्बी कम करने के लिए -

यह प्राणायाम आपके शरीर को लचीलापन प्रदान करता है, जिससे आपके शरीर की फालतू की चर्बी धीरे धीरे खत्म हो जाती है।

रक्त वाहिनियों से ब्लॉक हटाने के लिए -

यह प्राणायाम आपको रक्त परिसंचरण को सुधारने के साथ साथ यदि रक्त वाहिनियों में कोई रुकावट है तो उसे भी खोल देता है ताकि रक्त संचार अच्छे से हो।

हृदय की मजबूती के लिए -

आप अपने हृदय को चुस्त दुरुस्त और बलवान बनाए रखने के लिए इस प्राणायाम को कर सकते हो, यह प्राणायाम आपके दिल के सभी रोगों की जिम्मेदारी उठा सकता है।
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लीवर को दुरुस्त बनाने के लिए -

लीवर को दुरुस्त बनाए रखने में अनुलोम विलोम प्राणायाम आपकी मदद जरूर करेगा, अगर आपका लीवर कमजोर है तो आज से आप यह शुरू कर सकते हो।

दिमाग की मजबूती के लिए -

यह प्राणायाम आपकी यादाश्त बढ़ाने के साथ साथ आपके दिमाग की सेहत का भी भली भांति खयाल रखता है। साथ ही यह आपको एकाग्रता को भी बढ़ाता है जिससे आपको चीजें समझने और याद रखने में ज्यादा सहजता महसूस होगी।

तेज बढ़ाने के लिए -

हर तरह योग, प्राणायाम और ध्यान आपके चेहरे के तेज को बढ़ाता है, जो आपको भीड़ में अलग कर देगा।

बालों के लिए -

बालों की अच्छी सेहत के लिए आप इस प्राणायाम को अपना सकते हो। यह आपके बालों से जुड़ी हर समस्या को धीरे धीरे खत्म कर उन्हें काला, घना, चमकदार और मजबूत बनाए रखने में आपकी मदद जरूर करेगा।
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त्वचा की सेहत के लिए -

त्वचा की सेहत के लिए भी यह प्राणायाम हर तरह से बेजोड़ है, क्योंकि यह आपकी त्वचा को निखारने के साथ साथ उस शुद्धता प्रदान करता है जिससे हर तरह एलर्जी खत्म होती है और त्वचा पर तेज आता है।

थकान, खांसी झुकान से बचाव के लिए -

यदि आप इस प्राणायाम को अपना लेते हो तो भूल जाइए की आपमें कभी खांसी झुकाम जैसी समस्या भी होगी। यह आपकी थकान मिटाकर अच्छी नींद दिलाता है।

अनिंद्रा दूर करने के लिए -

यदि आप अनिंद्रा से परेशान हो तो यह प्राणायाम जरूर करें आपको जरूर फायदा होगा।

मन को शांत और सुविचारी बनाने के लिए -

जैसा कि हमने ऊपर बताया यह आपके एकाग्रता को बढ़ाता है और दिमाग को मजबूती देता है। साथ ही यह आपके मन को स्वच्छ और सुविचारी बनाता है तथा शांति प्रदान करता है।
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सावधानियां -

  1. अगर आपकी हाल ही में किसी भी तरह की सर्जरी हुई है, तो आप इस प्राणायाम को न करें।
  2. गर्भावस्था में कोई भी महिला यह प्राणायाम शुरू न करें और अगर करती है तो किसी अच्छे प्रशिक्षक की उपस्थिति में ही करें।
  3. यदि आप श्वसन संबंधी किसी भी गंभीर स्थति में तो यह प्राणायाम न करें।
  4. ब्रेन ट्यूमर और पेट के छालों से ग्रसित व्यक्ति अनुलोम विलोम न करें और यदि करें तो धीरे धीरे करें तथा अधिक देर तक सांस रोकने की कोशिश ना करें।
  5. जिन्हें अस्थमा और कैंसर जैसी समस्या है वे अधिक देर तक सांस न रोक और ना ही तीव्र गति से इस प्राणायाम को करें।
  6. जिस गति से सांस अंदर ले उसी गति से छोड़ें।
  7. हमेशा कोशिश करें कि सांस धीरे धीरे अपने अंदर भरें और कुछ देर बाद धीरे ही निकालें।
  8. स्वस्थ व्यक्ति जितना हो सके उतनी देर सांस रोकने का प्रयास करें। (और पढ़ें - डायबिटीज़ का डायट चार्ट)
  9. यह प्राणायाम सुबह के समय शौच आदि से निवृत होकर ही करें।
  10. अगर रात को करते हो तो इसके लिए आपको प्राणायाम करने से पहले 4 से 5 घंटे भूखा रहना होगा तथा प्राणायाम के 1/2 घंटे बाद तक कुछ भी नहीं खाएं।
  11. प्राणायाम की शुरुआत और अंत हमेशा बाएं नासिका रंद्र से ही करें। (और पढ़ें - कील मुंहासों  पक्का इलाज)
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