20 साल पुरानी हाई बीपी का इलाज | bp kam karne ka yoga | high blood pressure ke lakshan.

20 साल पुरानी हाई बीपी का इलाज | bp kam karne ka yoga | high blood pressure ke lakshan - आज की इस भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप यानि हाई बीपी. और लौ बीपी. का होना एक आप समस्या कही जा सकती है इन दोनों ही स्थतियों में व्यक्ति को बहुत ही गंभीर स्थति का सामना करना पड़ता है क्योंकि ये दोनों स्थतियाँ ही हमारे लिए खतरनाक हो सकती है।
20 साल पुरानी हाई बीपी का इलाज | bp kam karne ka yoga | high blood pressure ke lakshan.
जब हमारा ह्रदय ह्रदय में मौजूद रक्त को रक्त वाहिनियों के माध्यम से हमारे पूरे शरीर में संचारित करता है तो रक्त के द्वारा रक्त वाहिनियों पर जो दबाव डाला जाता है उसे हम बीपी. या ब्लड प्रेशर या रक्तचाप कहते है।
रक्तचाप या ब्लड प्रेशर अलग अलग स्थतियों में अलग अलग हो सकता है।

अगर रक्त का दबाव रक्त वाहिनियों पर अधिक है तो इसे हम उच्च रक्तचाप कहते हैं, और इसी क्रम में यदि रक्त वाहिनियों पर दबाव सामान्य स्थति से भी कम है तो इसे निम्न रक्तचाप या लौ ब्लड प्रेशर या लौ बीपी. के नाम से जाना जाता है।

20 साल पुरानी हाई बीपी का इलाज | BP Kam Karne Ka Yoga | High Blood Pressure Ke Lakshan.

नार्मल bp कितना होता है -

एक स्वस्थ व्यस्क का सामान्य रक्तचाप - सिस्टोलिक - 90 से 119 mmHg
डायस्टोलिक - 60 से 79mmHg
यह व्यक्ति में उम्र, और स्थति के आधार पर कम या अधिक होता है।
निम्न रक्तचाप या लौ बी.पी. - सिस्टोलिक - 90 mmHg या इससे कम।
डायस्टोलिक - 60mmHg या इससे कम।
उच्च रक्तचाप या हाई बी.पी. - सिस्टोलिक 140 से 159mmHg या इससे अधिक।
डायस्टोलिक - 90 से 99 या इससे अधिक।
रक्त का यह दबाव व्यक्ति की उम्र और स्थति के आधार पर अलग अलग हो सकता है। इस लेख के अंदर हम बात करने वाले हैं उच्च रक्तचाप या हाई बीपी. की जिसमे हम जानेंगे बीपी. हाई क्यों होता है, किन किन वजह से बीपी. हाई हो सकता है और हाई बप को किस तरह कण्ट्रोल किया जा सकता है और इससे हमेशा हमेशा के किस प्रकार छुटकारा पाया जा सकता है।
तो चलिए जान लेते है उन कारणों को जिनकी वजह से उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है -
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bp कैसे होता या क्या कारण है -

उम्र का अधिक होना -

बीपी की समस्या या इसकी संवेदनशीलता व्यक्ति की उम्र के साथ साथ बड़ती जाती है, अक्सर देखा गया है कि बड़ी उम्र के लोगों में बीपी की समस्या अधिक पाई जाती है बजाय वयस्कों के।

शारीरिक गतिविधियों की कमी -

शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण भी अक्सर बीपी के साथ साथ अन्य कई सारी बीमारियां आपमें घर कर लेती हैं, यदि आप इन तमाम समस्याओं से बचना चाहते हो तो कभी भी अपने शरीर को जरूरत से अधिक आराम ना दें।
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मोटापा -

आज की इस भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में मोटापे की समस्या आम समस्या कही जा सकती है, क्योंकि आज के समय में इसी तरह खान पान और क्रिया कलाप है, जो आगे जाकर आपमें डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप सहित अनेकों बीमारियों को न्योता है।
अतः इन सभी समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है अपने वजन को हमेशा कंट्रोल में रखें।

अनुवांशिकी -

उच्च रक्तचाप की समस्या अनुवांशिकी है अगर आपके करीबी को यह समस्या है तो संभावना है कि यह दिक्कत आपको भी हो सकती है।

नमक का अधिक सेवन -

अगर आप नमक का अधिक जरूरत ज्यादा इस्तेमाल करते हो तो यह आपके अंदर हाई बीपी को जन्म सकता है, अतः कोशिश करे कि नमक कम से कम ही इस्तेमाल हो।

धूम्रपान की लत -

धूम्रपान की लत एक बहुत ही बुरी लत है जो एक स्वस्थ व्यक्ति को बहुत अधिक बीमार बनाने के लिए काफी है, अगर आप चाहते हो कि आपकी बीपी हमेशा नॉर्मल रहे तो आपको धूम्रपान कि इस बुरी आदत को छोड़न होगा तभी आपकी बीपी कंट्रोल रहेगी।

अल्कोहल का सेवन करना -

अगर आपकी दिनचर्या में आप अल्कोहल को भी शामिल करते हो तो समझ लीजिए यह आपकी बीपी को बढ़ाने में अपनी भूमिका जरूर निभा रहा है, आप चाहते हो कि आपकी यह समस्या अच्छे से और जल्दी ठीक हो तो आपको अल्कोहल का इस्तेमाल कम करना होगा या बिल्कुल ही नहीं करना।

मानसिक तनाव -

मानसिक तनाव भी व्यक्ति की बीपी को बढ़ाने वाला कारक कहा जा सकता क्योंकि अगर आप किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से ग्रस्त हो तो संभव है कि आपका बीपी या ब्लड प्रेशर जरूर बढ़ेगा। हमेशा कोशिश करें कि आप हर तरह के मानसिक तनाव से दूर रहें।

अधिक वसा युक्त आहार -

यदि आप अपने आहार में वसा। काधिक इस्तेमाल कर रहे हो तो संभावना है की यह भी आपकी बीपी को बढ़ाने के लिए एक जिम्मेदार कारक हो सकती है, अतः कोशिश करें कि जरूरत से ज्यादा वसा आपके भोजन में ना हों।
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मधुमेह -

मधुमेह के मरीजों में बीपी का अधिक होना एक आम समस्या कही जा सकती है, अगर आप डायबिटीज़ के शिकार हो तो कोशिश करें कि आपका शुगर लेवल हमेशा नॉर्मल रहे।

पोटेशियकी कमी -

आपके अंदर पोटेशियम की कमी यानी सोडियम की अधिकता आपके लिए हाई बीपी का कारण हो सकती है क्योंकि जब शरीर में सोडियम और पोटेशियम सही संतुलन ही नहीं होगा तो यह समस्या आपमें जरूर होगी।

विटामिन डी की कमी -

विटामिन डी की कमी से भी अक्सर उच्च रक्तचाप या हाई बीपी की समस्या पैदा हो जाती है, अतः अपने भोजन में विटामिन डी के स्रोत जरूर शामिल करें और धूप में जरूर टहलें।
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High Blood Pressure Ke Lakshan -

आमतौर पर हाई बीपी. के लक्षण तभी दिखाई देते हैं जब यह एक गंभीर समस्या के रूप में उभर कर सामने आती है। जैसे कि - दिल का दौरा पड़ना, स्ट्रोक, नाक से रक्त का आना और अंधापन।
इसके सामान्य लक्षणों में थकान, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, नकसीर आना, सूजन, अनियमित धड़कनों का होना, सीने में दर्द इत्यादि लक्षण बहुत से लोगों में दिखाई देते हैं।

हाई बीपी का इलाज | BP Kam Karne Ka Yoga | High Blood Pressure Ke Lakshan.

दालचीनी -

उच्च रक्तचाप हाई बीपी के मरीजों के लिए दालचीनी एक बहुत ही बेहतर औसाधी है। अगर कोई भी व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान है तो यकीन मानिये दालचीनी का यह नुस्खा उसके लिए रामबाण की तरह काम करेगा। इसको प्रयोग में लेने के लिए शहद की आवश्यकता होती है,
1 चम्मच दालचीनी पाउडर को सुबह शाम 1 चम्मच शहद के साथ मिक्स करके 1 गिलास गर्म पानी साथ लें।
और यदि आप डायबिटीज़ के मरीज हो तो शहद का इस्तेमाल न करें, इस बात का जरूर ध्यान रखें।
दालचीनी का पावडर इतना कारगर है कि यह आपके अंदर मौजूद सभी तरह की हृदय से संबंधित समस्याओं को जड़ से ख़त्म कर देगा। साथ ही यह आपको ट्राई ग्लिसराइड, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से भी छुटकारा दिलाता है।

लौकी का ज्यूस -

उच्च रक्तचाप के लिए लौकी का ज्यूस भी एक बहुत ही बेजोड़ औसधी है। अगर आप लौकी के ज्यूस का प्रयोग करते हो तो निश्चिंत हो जाइए। क्योंकि यह आपकी हाई बिपी को बहुत ही बेहतर तरीके से कंट्रोल रखता है। साथ ही यह आपके कद को बढ़ाने में भी आपकी मदद करता है, इन सब के साथ लौकी ज्यूस आपमें मोटापा, डायबिटीज़, कोलेस्ट्रॉल, और तमाम हृदय की बीमारियों को जड़ से खत्म कर आपको इन सब से राहत दिलाता है।
लौकी का ज्यूस तैयार करने के लिए आपको जरूरत होगी -
  • 1 ताजा लौकी
  • 5 - 6 पत्ते पुदीना के
  • 5 - 6 पत्ते तुलसी के
  • 4 - 5 काली मिर्च
ये सब चीजें आप लीजिए और सबसे पहले मिक्सर में चला कर इन सब का ज्यूस तैयार कीजिए। और सबसे पहले सुबह के समय खाली पेट एक गिलास इस ज्यूस इस्तेमाल कीजिए।
इससे आपकी हाई बीपी की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।
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अर्जुन की छाल -

हाई बीपी और कमजोर दिल वालों के लिए आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को एक बहुत ही असरदार और बेजोड़ औसधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
यह आपको किसी भी पंसारी की दुकान पर बहुत ही सस्ते दामों में मिल जाएगी जो आपको बड़े बड़े ऑपरेशन से बचा सकती है।
अर्जुन की छाल का आप लगातार 3 - 4 महीने तक इस्तेमाल करते हो तो यह आपकी रक्त वाहिनियों में मौजूद बड़े से बड़े ब्लॉकेज को सही कर देती है। अगर आपका दिल कमजोर है आप थोड़ी सी समस्या ही घबरा जाते हो तो यह आपके लिए एक बेजोड़ औसधि है।
उच्च रक्तचाप या हाई बीपी. के लिए आप एक चम्मच अर्जुन की छाल को एक गिलास पानी में गर्म कीजिए और जब यह पानी आधा रह जाए तब इसे ठंडा करके पी लीजिए। यकीन मानिए यह दवा भी आपको हजारों रुपयों की दवाओं से बचाएगी और आपका बीपी कंट्रोल रहेगा।
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बिल्व पत्र के पत्ते -

बिल्व पत्र के पत्तों को भी आयुर्वेद में अनेक बीमारियों की दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।
यह आपमें हाई बीपी. के साथ साथ, आपके दिल को मजबूत बनाता है, मोटापे को कम करता है, हड्डियों से संबंधित समस्याओं को दूर करता है। आपके दिल और सभी रक्त वाहिनियों को साफ करके रक्त परिसंचरण में अपनी भूमिका निभाता है।
इसे इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको ताजा बिल्व पत्रों को मिक्सी में चला कर ज्यूस तैयार करना होगा, और इसे सुबह के समय खाली पेट इस्तेमाल करना होगा।

मेथीदाना -

मैथीदाने का भी हमारे आयुर्वेद में बहुत बखान मिलता है, उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करने के साथ साथ सभी प्रकार के स्त्री रोगों में फायदेमंद है। चाहे वो माहवारी के संबंध में हो या सफेद पानी की समस्या हो सभी तरह की समस्याओं में मेथीदाना आपको फायदा देगा।
इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको दो चम्मच मेथीदानों को रात के समय गर्म पानी मे भिगो कर रख देना है, और सुबह उठकर खाली पेट ही इस पानी को पीकर मेथीदानों को चबा चबा कर खाना है। यह आपकी बीपी. को हमेशा कंट्रोल में रखेगा और आप इस बीमारी से छुटकारा पा लोगे।

BP Kam Karne Ka Yoga -

अगर आपको बीपी. कम करनी है या इसे हमेशा के लिए नॉर्मल बनाए रखना है तो आपको ये तीन प्राणायाम जरूर करने होंगे -
भस्त्रिका प्राणायाम।
कपाल भांति।
अनुलोम विलोम।
ये तीनों प्राणायाम हाई बीपी. के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है अगर आप नहीं जानते कि इन प्राणायाम को कैसे किया जाता है, तो इन पर क्लिक करके आप आप जान सकते हो कि इन प्राणायाम को कैसे किया जाता है।

वाटर पिल्स -

वाटर पिल्स जिन्हें डाई-युरेटिक्स भी कहा जाता है। बहुत से लोग इन्हें वजन कम करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ये वाटर पिल्स हमारे हाई बीपी को कंट्रोल करने के काम आती हैं।
जिनके प्रयोग से हमारे शरीर में सोडियम की मात्रा कम हो जाती है, जिससे बीपी. स्वत ही काम हो जाता है। ये डाई यूरेटिक मूत्र बनाने की प्रक्रिया को बढ़ावा देती है, जिससे हमारे शरीर पानी का अधिक से अधिक निष्कासन होता है और बीपी कंट्रोल रहती है।
वाटर पिल्स के कई सारे साइड इफेक्ट्स देखे गए है, अतः इनका प्रयोग बिना किसी डॉक्टर की सलाह के न करें यह आपके लिए बेहतर होगा।
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