भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें | bhastrika pranayam ke kya kya benefits hai.

भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें | bhastrika pranayam ke kya kya benefits hai - इस पोस्ट में हम जानेंगे भस्त्रिका प्राणायाम क्या होता है, भस्त्रिका प्राणायाम को कैसे किया जाता है, इसके क्या क्या बेनिफिट्स है और क्या सावधानियां हैं। भास्त्रिका का हिंदी अर्थ होता है धौंकनी, जिसे अक्सर हवा फूंकने के काम में ली जाती है, जिस प्रकार धौंकनी से हवा फूंकने पर जो आवाज आती है वहीं आवाज भस्त्रिका प्राणायाम करते वक्त आती है।
भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें | bhastrika pranayam ke kya kya benefits hai.
भस्त्रिका प्राणायाम एक साधारण सा प्राणायाम है, जो हमारे मन और तन को शांत और स्वच्छ रखने में अपनी अहम भूमिका निभाता है।
इस प्राणायाम के अंदर लगातार श्वांस अंदर बाहर की जाती है इसकी गति अलग अलग हो सकती है, सामान्य तौर पर भस्त्रिका प्राणायाम सामान्य, मध्यम और तीव्र गति से किया जा सकता है।

भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें | bhastrika pranayam ke kya kya benefits hai.

bhastrika pranayam ke kya kya benefits hai -

भस्त्रिका प्राणायाम हमारे लिए बहुत फायदेमंद है अगर इसे सही स्थति, सही समय और अच्छे प्रशिक्षक की उपस्थिति में किया जाए।
भस्त्रिका प्राणायाम हमे अनेक रोगों से बचाता है जैसे कि -

मोटापा -

आज के समय इस आधुनिक जीवनशैली के चलते मोटापे की समस्या एक आम समस्या हो गई है जिसके चलते लोगों को अनेक बिमारियों से झूजना पड़ता है। अगर आप मोटापे से परेशान हो तो आपको भस्त्रिका प्राणायाम जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी को ख़त्म करने के साथ साथ आपको एक नए अहसास की और ले जायेगा, आपका मन हमेशा शांत और स्वस्छ रहेगा।
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उच्च रक्तचाप -

अगर आप उच्च रक्तचाप या हाई bp की समस्या से घिरे हुए हो तो यह प्राणायाम आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है, लेकिन इस बात का जरूर ध्यान रखें की इस स्थति में जब भी आप यह प्राणायाम करो तो किसी अच्छे प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।

अस्थमा -

अस्थमा के मरीजों के लिए भी भस्त्रिका प्राणायाम बेहद लाभकारी है, शुरू में जब आप इस प्राणायाम को करे तो धीरे धीरे और कुछ समय के लिए ही करें। बाद में आप अपनी क्षमता के आधार पर कर सकते हो।

पेट की चर्बी -

भस्त्रिका प्राणायाम करते समय जब हमारी सांस तीव्र गति से अंदर बाहर होती है तो यह हमारे पेट और सभी एब्डोमिनल पार्ट्स को लचीला बना देती है, जिससे आपके पेट की चर्बी बहुत ही तेज गति पिघलना स्टार्ट हो जाती है।
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फेफड़ों की मजबूती के लिए -

भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत और स्वच्छ बनाने के लिए बेहद कारगर और असरदार तरीका है।

रक्त शुद्धि के लिए -

इस प्राणायाम में हमारी साँसे तीव्र गति से अंदर बाहर होती है, जिनसे हमारे रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरुरी है। और इस तरह हमारे रक्त में मौजूद सभी विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

गले की सुजन -

अगर आपके गले में सूजन है और आप आराम आराम से इस प्राणायाम को करते हो तो इसे आपके गले की सूजन जल्दी ठीक होती है।

बलगम -

जिन लोगों में हमेशा बलगम की समस्या रहती है उन्हें रोज भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए क्योंकि यह प्राणायाम आपके फेफड़ों को शुद्ध करने के साथ साथ श्वसन सम्बन्धी हर विकार को नष्ट कर देता है।
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भूख बढ़ाने  लिए -

जिन्हे भूख कम लगती है उन्हें यह प्राणायाम जरूर करना चाहिए यह आपकी भूख बढ़ाने के साथ साथ आपके पाचन परिक्रम को भी बूस्ट करता है।

नाड़ी प्रवाह के लिए -

यह आपके नाड़ी प्रवाह को शुद्ध कर सभी विकारों को दूर करता है।

शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए -

इस प्राणायाम को करने से आपके शरीर में गर्मी पैदा होती है, जिससे पसीने के साथ आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं।

सभी तरह की श्वास समस्याओं के लिए -

अगर आप किसी भी तरह के श्वसन विकार से ग्रसित हो तो आपके लिए भस्त्रिका प्राणायाम बेहद लाभकारी है, इसे अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।
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भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें {bhastrika pranayam kaise kare} -

  • सबसे पहले सिद्धासन या पदमासना अवस्था बैठ जाएं या आप जिस आसान में बैठना चाहें बैठ सकते हो लेकिन यह प्राणायाम करते समय आपकी गर्दन और शरीर तना हुआ हो।
  • यदि आप सिद्धासन अवस्था में बैठते हो तो इसके लिए आपका दाहिना पैर घुटनों से मुड़कर बाएं पैर की जंगा के ऊपर होना चाहिए और बायां पैर घुटनों से मुड़कर दाहिने पैर की जंगा के ऊपर हो।
  • अपने दोनों हाथ आगे की तरफ अपने अपने घुटनों पर हो।
  • इसके बाद सबसे पहले इस स्थति में बैठ कर धीरे धीरे सांस लें और छोड़ें।
  • अब आपको लंबी और गहरी सांस लेनी है और छोड़नी है। ध्यान रहे आपके फेफड़े पूरी तरह फूल जाएं और सांस छोड़ने पर पूरी तरह खाली हो जाए।
  • इस तरह आपको एक बार में पांच मिनट तक करना है।
  • एक बार जब आप भस्त्रिका प्राणायाम अच्छे  करले तब आप इसे मध्यम और तीव्र गति से भी कर सकते हो। {और पढ़ें - घुटनो के दर्द या आर्थराइटिस का पक्का इलाज}

भस्त्रिका प्राणायाम में सावधानियां -

  1. अगर आप गंभीर अस्थमा या उच्च रक्तचाप के मरीज हो तो आपको यह केवल धीमी गति से ही करना होगा।
  2. गर्भावस्था में कोई भी महिला इसे शुरू ना करें।
  3. अगर आपने कोई सर्जरी करवाई है तो भस्त्रिका प्राणायाम ना करें।
  4. अगर आप ब्रेन ट्यूमर, पेप्टिक अल्सर, मोतियाबिंद आदि से ग्रसित हो तो आपको भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए। {और पढ़ें - हाई  बीपी का पक्का इलाज}
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