ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण, कारण और इलाज, Symptoms of breast cancer in hindi.

Symptoms of breast cancer in hindi - भारत जैसे विकाशसील देश में महिलाओ में ब्रैस्ट कैंसर या स्तन कैंसर दिनों दिन अपने पाँव पसारता ही जा रहा है अगर समय रहते इसकी सही रोकथाम नहीं की गयी तो वह समय दूर नहीं जब 10 में से 5 महिलाएं इस भयंकर बीमारी से ग्रस्त होंगी, अन्य देशों की अपेक्षा भारत में ब्रैस्ट कैंसर से ग्रस्त मरीजों की संख्या ज्यादा है वहीं अगर विकसित देशों की बात की जाये तो वहां की महिलाओ के मुकाबले भारत की महिलाओ में स्तन कैंसर होने की उम्र कम है।
ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण, कारण और इलाज, Symptoms of breast cancer in hindi.
सामान्यतया ब्रैस्ट कैंसर 47 साल की उम्र तक हो सकता है, ब्रैस्ट कैंसर का ज्यादा खतरा 30 की उम्र से लेकर 40 की उम्र तक होता है।
आमतौर पर ब्रैस्ट कैंसर ब्रैस्ट की कोशिकाओं की अनियमित और अनकंट्रोल वृध्दि के से उत्पन्न होता है जो अपने आसपास के क्षेत्र में आसानी से फ़ैल जाता है यह ब्रैस्ट के अलग अलग हिस्सों से पैदा हो सकता है जैसे डक्ट्स से जो निप्पल तक दूध पहुंचाने का काम करती है जिसे हम डक्टल कैंसर कहते हैं कुछ कैंसर ग्रंथियों से शुरू होते है जो दूध बनाने का काम करती हैं जिसे हम लोब्यूलर कैंसर कहते है इनके साथ ही ब्रैस्ट कैंसर के और भी प्रकार है जो बहुत कम पाए जाते है।
ज्यादातर कैंसर एक गांठ या गुमड़ के रूप में होते है लेकिन सभी नहीं कुछ कैंसर बिना गांठ वाले भी होते है
जिनका पता मैमोग्राम से आसानी से लगाया जा सकता है इसके अंदर स्तनों का x-ray लिया जाता है जिससे कैंसर कोशिकाओं को पहचाना जाता है।
ब्रैस्ट कैंसर में स्तनों के अंदर गांठ बन जाती है और कई बार नहीं भी बनती और स्तनों में गांठ के होने का सीधा मतलब यह भी नहीं की यह एक कैंसर है नहीं यह जरुरी नहीं की मौजूद गांठ ब्रैस्ट कैंसर ही है क्योंकि इस तरह की गांठे दो प्रकार की होती है जो पैदा तो कोशिकाओं की अनियमित वृध्दि से ही होती है लेकिन इनमे भी बड़ा अंतर होता है एक होती है बिनाइन और एक होती है। मेलिग्नेंट जिनमे से बिनाइन एक कैंसर कारक गांठ होती है जबकि मेलिग्नेंट एक नॉन कैंसर कारक होती है जिसमे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता और ना ही यह अपनी जगह से दूसरी जगह पर फैलता।

ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण, कारण और इलाज, Symptoms of breast cancer in hindi.

ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण: (symptoms of breast cancer in Hindi)

ब्रैस्ट कैंसर होने पर कई सारे ऐसे लक्षण दिखाई पड़ते है जिनसे कोई भी महिला आसानी से खुद ही पता लगा सकती है की ब्रैस्ट कैंसर है या कुछ और जिनमे से कुछ मुख्य लक्षण हम आपको बताने जा रहे है यदि आपमें इनमे से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किये किसी अच्छे से स्पेशलिस्ट को दिखाए और सलाह के अनुसार जरुरी टेस्ट करवाएं।
गांठ या गुमड़: स्तनों में गांठ या गुमड़ का दिखाई ना देकर केवल महसूस होना साथ ही स्तनों की ऊपर के तरफ और बाजु की तरफ सूजन आना ब्रैस्ट कैंसर का लक्षण हो सकता है।
आकर में बदलाव: कैंसर कारक कोशिकाओं की उपस्थ्ति के कारण स्तनों की साइज़ और शाप में बदलाव आ जाता है जैसे एक स्तन का दूसरे के मुकाबले ले छोटा या बड़ा होना।
त्वचा में बदलाव: कैंसर कारका कोशिकाओं की उपस्थ्ति से स्किन की बनावट में बदलाव नजर आने लगता है। स्तनों की स्किन में सिकुड़न या गड्डे नजर आने लगते है।
रंग में बदलाव: ब्रैस्ट की त्वचा का रंग बदलकर हल्का लालपन में आ जाता है और त्वचा संक्रमित दिखाई पड़ती है यह भी ब्रैस्ट कैंसर का एक लक्षण है।
निप्पल्स में बदलाव: ब्रैस्ट कैंसर होने की स्थति में स्तनों की निप्पल में कई बदलाव नजर आते है जैसे निप्पल्स का उल्टा होना या अंदर की तरफ धंसना निप्पल्स पर लाल दाने या चकत्ते बनना।
निप्पल से स्राव: ब्रैस्ट कैंसर की स्थति में निपल्स से रिसाव होने लग जाता है जिसमे सफ़ेद और खुनी स्राव के आलावा हल्का हरा या पीला भी हो सकता है।
खरोंचे आना: ब्रैस्ट कैंसर होने पर स्तनों के निप्पल्स पर खरोंच और लाल चकत्ते के साथ खुरदरापन दिखाई देता है।
इन सभी लक्षणों में से यदि आपको कोई भी लक्षण दिखाई दे तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करे और तुरंत किसी अच्छे से स्पेशलिस्ट डॉक्टर की सलाह लें तथा मैमोग्राम जरूर करवाए क्योंकि यह ज्यादा महंगा भी नहीं है और सिंपल सा एक एक्स रे है जिससे छोटे से छोटे कैंसर की पहचान की जा सकती है।

ब्रैस्ट कैंसर के कारण: (cause of breast cancer in Hindi)

ब्रैस्ट कैंसर के लिए बहुत सारे कारक जिम्मेदार हो सकते है लेकिन इसका कोई मुख्या और सही सही कारण अभी तक पता नहीं लगा पाया यानी अभी तक इसका निश्चित कारण अननोन है, फिर भी कुछ कारण आंके गए है जो किसी भी महिला में आसानी से ब्रैस्ट कैंसर को बढ़ावा दे सकते है इनमे से मुख्य कारण यहाँ बताये जा रहे है।
उम्र: उम्र या आयु ब्रैस्ट कैंसर के लिए एक जिम्मेदार कारण बन सकती है 20 की आयु तक किसी भी महिला में ब्रैस्ट कैंसर का चांस 0.6% होता है वहीं अगले 70 साल में यह 3.84 हो जाता है।
अनुवांशिकता: अनुवांशिकता यानि जेनेटिक्स यदि किसी महिला के करीबी संबधी के ब्रैस्ट कैंसर हो चुका है तो BRCA1 और BRCA2 जीन वाली महिला में ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
ब्रैस्ट कैंसर का इतिहास: जिन महिलाओं को स्तन कैंसर हो चुका है, उन्हें फिर से होने की संभावना हो सकती है, कुछ प्रकार के गैर-कैंसर वाले ब्रैस्ट ट्यूमर होने के बाद बाद में कैंसर के विकास की संभावना बढ़ जाती है।
सघन स्तन ऊतक: उच्च घनत्व स्तन ऊतक में स्तन कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक है।
एस्ट्रोजन एक्सपोजर और ब्रैस्ट फीडिंग: लंबे समय तक एस्ट्रोजन के संपर्क में आने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
यह रजचक्र शुरू होने से लेकर रजोनिवृति तक हो सकता है क्योंकि इस बीच एस्ट्रोजन का स्तर अधिक होता है, एक साल से अधिक स्तनपान कराना स्तन कैंसर की संभावना को कम कर देता है संभवत: गर्भावस्था के बाद गर्भावस्था एस्ट्रोजेन के संपर्क में कमी आती है।
ओवर वेट: ओवर वेट वाली महिलाओ में ब्रैस्ट कैंसर का खतरा अधिक होता है शुगर से भी इसकी संभावना अधिक हो जाती है।
एलकोहॉल: एलकोहॉल का सेवन ब्रैस्ट कैंसर के लिए जिम्मेदार कारकों में से एक हो सकता है, अध्ययनों से पता चला है कि जो महिलाएं 3 से अधिक पेय पदार्थों का उपभोग करती हैं, उनमें ब्रैस्ट कैंसर के लिए 1.5 गुना जोखिम होता है।
हार्मोन: एस्ट्रोजन के बढ़े स्तर के कारण हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और बर्थ कंट्रोल पिल्स का उपयोग ब्रैस्ट कैंसर का कारण हो सकता है।

ब्रैस्ट कैंसर का उपचार: (treatment of breast cancer in Hindi)

ब्रैस्ट कैंसर का इलाज कई तरह से किया जाता है उसकी साइज शेप और जगह के अनुसार, जिनमे मुख्यतः सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और हॉर्मोन ब्लॉकिंग थेरेपी प्रमुख हैं।
इन सब के आलावा भी कुछ आयुर्वेदिक उपचार हैं जिनसे स्तनों की गांठ या कैंसर को मिटाया जा सकता है।

अरंडी (caster) से कैंसर का उपचार:

कैंसर के लिए अरंडी को बहुत ही कारगर औसधि माना जाता है, जिस महिला को अपने स्तनों में हलकी गांठ महसूस हो तो वह आपमें स्तनों पर अरंडी के तेल और उसके पत्तों का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन यदि आपको पता है की यह गांठ कैंसर कारक है तो आप जल्द ही किसी अच्छे से स्पेशलिस्ट से सलाह ले क्योंकि यह स्थति जानलेवा भी हो सकती है। यहाँ बताया गया उपचार केवल गैर कैंसर कारक ब्रैस्ट ट्यूमर के लिए है।
इसके लिए आपको अरंडी के पत्तों पर ऊपर की तरफ अरंडी का तेल लगाकर उसे हल्की आंच पर सेंकना है, यह ध्यान रहे की पत्ता मुलायम हो जलना नहीं चाहिए, आप चाहे तो तवे का भी इस्तेमाल कर सकते हो अरंडी के पत्तों पर इसका तेल लगाकर तवे पर हलके से गर्म करे पत्तों के मुलायम होने के बाद इन्हे हल्का ठंडा करके अपने स्तनों पर बाँध ले इससे आपके स्तनों की गांठ जरूर पिघल जाएगी।

शीशम से ब्रैस्ट ट्यूमर का उपचार:

इसमें लिए आपको शीशम का तेल और शीशम के पत्तों के रस का उपयोग करना है।
इसके लिए आपको अपने स्तनों पर शीशम के तेल की दिन में दो बार मसाज करनी है साथ ही आप इसके तेल को दवा के रूप में भी पी सकती है ट्यूमर के लिए शीशम के पत्तों का ज्यूस भी फायदेमंद होता है।

ब्रैस्ट कैंसर से बचाव: (prevention of breast cancer in Hindi)

  • 30-40 की उम्र में जाकर हर महिला को ब्रैस्ट कैंसर का खतरा बना रहता है अतः उम्र के इस मोड़ पर थोड़ी सावधानी जरूर रखें, ताकि ब्रैस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।
  • समय पर ब्रैस्ट कैंसर के लिए टेस्ट करवाते रहें। स्तनों में किसी भी प्रकार की असामान्यताओं को नजरअंदाज ना करें। 
  • महिला को अपने जीवनकाल में ब्रैस्ट फीडिंग जरूर करानी चाहिए यह बच्चे और माँ दोनों के लिए ही जरुरी होता है। 
  • किसी भी प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग ना करें। 
  • स्तनों पर हर हफ्ते जैतून तेल या अरंडी के तेल की मसाज करते रहे। 
  • अल्कोहोलिक पेय पदार्थो आदि का प्रयोग बिल्कुल ना करें। 
  • ब्रैस्ट के आकार को बढ़ाने वाली किसी भी तरह की मेडिसिन या जेल आदि का प्रयोग ना करें। 
  • अपने वजन को नियंत्रित रखें।

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