गठिया बाई का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi.

गठिया बाई का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi (अर्थराइटिस का इलाज) - गठिया या आर्थराइटिस जिसे हम वायुदोष भी कहते हैं, यह एक प्रकार का वात रोग है।
शरीर में वात पित्त की मात्रा अधिक होने की स्थति में गठिया (arthritis) की समस्या होती है।
लोगों में यह मिथ अभी भी फैला हुआ है कि आर्थराइटिस या गठिया की समस्या केवल पुढ़ापे (old age) में ही होती है।
लेकिन आप यह जान लें कि यह समस्या कभी भी किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को हो सकती है।

आज दुनियाभर में लाखों लोग (arthritis) गठिया की समस्या से पीड़ित हैं।
साथ ही इलाज के नाम पर सिर्फ और सिर्फ दर्द निवारक गोलियां (pain killers) बस, एलोपैथी में इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है।
मरीज को केवल दर्द निवारक (pain killers) गोलियों के सहारे ही अपने दर्द को सहा जाता है।
लेकिन अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि प्रकृति ने हमें ऐसा खजाना दिया है जिसकी मदद से बड़ी से बड़ी समस्या को आसानी से जड़ से खत्म किया जा सकता है।
गठिया बाई का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi.
gathiya ka ilaj
इसके साथ ही यदि आप अपने आहार को संतुलित और सुपाच्य रखते हैं तो आपको कभी भी किसी भी प्रकार की दवा (medicine) की आवश्यकता नहीं होती है।
Arthritis या गठिया तीन प्रकार की होती है और इनके लक्षण भी अलग अलग होते हैं।
आमतौर पर गठिया में जोड़ों के अंदर दर्द (joint pain) और सूजन की शिकायत रहती है।
लेकिन इसका यह भी मतलब नहीं है कि हर प्रकार का जोड़ों का दर्द arthritis हो सकता है।
इसके कुछ अलग लक्षण और पहचान होती है जिसके आधार पर आप हर प्रकार की गठिया और सामान्य दर्द (normal pain) में आसानी से पहचान कर सकते हो।
आज हम जानेंगे गठिया बाई का बेस्ट इलाज (gathiya ka ilaj), arthritis in Hindi, rheumatoid arthritis in hindi आदि के संदर्भ में।
(और पढ़ें : घुटनों के दर्द की बेस्ट दवा)

गठिया बाई का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi.


इस लेख में हम बात करने वाले हैं गठिया के प्रकार (types) इसके लक्षण (symptoms) कारण (cause) और बेहतर से बेहतर प्राकृतिक और घरेलू इलाज की।
साथ आपको कुछ बचाव बताएंगे जिनके आधार पर आप इस तरह की समस्या से बचे रह सकते हो और ये बचाव इस समस्या को उपचारित करने में भी बेहद लाभकारी साबित होंगे।

गठिया (Arthritis) के प्रकार - (Types of arthritis in Hindi)

आर्थराइटिस मुख्यत तीन प्रकार की होती है।
  1. संधिवात (osteoarthritis) -
  2. आमवात (reumatoid arthritis) -
  3. वातरक्त (gout arthritis) -

संधिवात (osteoarthritis in Hindi) -

Osteoarthritis जिसको हम संधिवात के नाम से भी जानते हैं।
अक्सर इसे बुढ़ापे की समस्या कहा जाता है लेकिन यह उम्र के किसी भी मोड़ में पैदा हो सकती है।
इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार कारक आपका खानपान और आपकी दिनचर्या है।
गठिया का यह प्रकार आपके अंदर सायनोवियल फ्लूड के कम होने पर पैदा होता है।
जिसके कारण जब भी आपका शरीर गतिशील होता है तो उस दौरान आपकी हड्डियां आपस में घिसने लग जाती हैं।
संधिवात मुख्यरूप से आपके घुटनों और कूल्हों की हड्डियों के जोंडो को ज्यादा प्रभावित करता है।
क्योंकि इन जोड़ों पर ही हमारे शरीर का पूरा वजन रहता है।

आमवात (reumatoid arthritis in Hindi) -

असल में इसे गठिया रोग के नाम से जाना जाता है, जो अधितर लोगों में देखने को मिलती है।
यह समस्या आपमें अनुवांशिक कारणों की वजह से भी पैदा हो सकती है।
गठिया बाय का यह सबसे आम प्रकार है मुख्य रूप से गठिया एक प्रकार की ऑटो इम्यून डिजिज है।
यानी आपके ही प्रतिरक्षा तंत्र की खराबी के कारण यह समस्या पैदा होती है।
इसके कारण कोई भी व्यक्ति कभी भी किसी भी उम्र में इसका शिकार हो सकता है।

वातरक्त (gout arthritis in Hindi) -

गाउट आर्थराइटिस एक प्रकार का मेटाबोलिक यानी की आपकी उपापचय क्रिया से जुड़ा हुआ गठिया है।
आपकी उपापचय क्रिया में गड़बड़ी की वजह से गठिया का यह प्रकार आपके जोड़ों को प्रभावित कर सकता है।
इसके अंदर आपके जोड़ों में यूरिक एसिड जमा होने लग जाता है जिससे आपको संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं।
(और पढ़ें : यूरिक एसिड के शुरुआती लक्षण)

गठिया (Arthritis) के लक्षण - (Symptoms of arthritis in Hindi)

जिस प्रकार गठिया या आर्थराइटिस के प्रकार अलग अलग हैं उसी प्रकार इनके लक्षण भी भिन्न भिन्न हैं।
इन लक्षणों के आधार पर आपको आसनी से यह पता लग जाएगा कि आपको सामान्य जोड़ों का दर्द है या गठिया है और गठिया है तो वह कौन से प्रकार की है।

संधिवात के लक्षण - (Symptoms of osteoarthritis in Hindi)

Osteoarthritis में आपके जोड़ों का ग्रीस यानी सायनोवियल फ्लूड खत्म हो जाता है इसके कारण -
आपको चलने फिरने, वजन उठाने और ऊंचाई पर चढ़ने में परेशानी होती है।
आपके जोड़ों कि हड्डियों से घूमते समय या काम करते समय कट कट की आवाज आती है।
एक जगह बैठे रहने के बाद जोड़ अकड़ जाते हैं।

आमवात के लक्षण - (Symptoms of reumatoid arthritis in Hindi)

Reumatoid arthritis अनुवांशिक कारणों और प्रतिरक्षा तंत्र की खराबी के कारण होता है।
इसके लक्षणों में सबसे मुख्य लक्षण हैं -
जब भी आपको शरीर के एक जोड़ में दर्द होता तो उसी के समानांतर दूसरे जोड़ में भी यह समस्या होती है।
गठिया के इस प्रकार में आपके जिस जोड़ में दर्द है वहां गर्माहट रहती है।
जोड़ों में हल्की सूजन के साथ लालपन आ जाता है।
खासकर सुबह के समय आपको जोड़ों में अधिक जकड़न होती है।

वातरक्त के लक्षण - Symptoms of gout arthritis in Hindi)

गाउट आर्थराइटिस यूरिक एसिड के जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। इसके लक्षणों में मुख्य लक्षण हैं -
वातरक्त में आपके अचानक तीव्र दर्द का सामना करना पड़ता है।
हड्डियां मुड़ने लग जाती है तथा जोड़ों में विकृति आ जाती है।

गठिया (Arthritis) के कारण - (Causes of Arthritis in Hindi)

गठिया या आर्थराइटिस का मुख्य निश्चित कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।
लेकिन कई ऐसी स्थति हैं जो आपमें आर्थराइटिस या गठिया की समस्या के लिए जिम्मेदार कारण बन सकती हैं।
इनमे से निम्न मुख्य कारण आपमें गठिया का रोग पैदा कर सकते हैं -
  • अनुवांशिकता आपमें आमवत के लिए एक जिम्मेदार कारण हो सकती है, अगर आपके करीबी को यह समस्या है तो हो सकता है आपमें भी इसकी संभावना हो।
  • प्रतिरक्षा तंत्र में खराबी के कारण भी आपको गठिया की शिकायत हो सकती है।
  • ज्यादा गरिष्ठ भोजन जो पचाने में आसान न हो आर्थराइटिस का कारण बन सकता है।
  • मैदा और इससे बनी चीजों का ज्यादा सेवन करना भी आर्थराइटिस का कारण हो सकता है।
  • चिंता और तनाव भी आर्थराइटिस का एक बहुत ही बड़ा कारण है।
  • बढ़ा हुआ वजन गठिया को जन्म दे सकता है।
  • शरीर में बादी और गर्मी पैदा करने वाली चीजें भी गठिया का कारण बन सकती हैं।
  • अनियमित जीवनशैली भी आर्थराइटिस का एक बड़ा कारण हो सकती है।
(और पढ़ें : बवासीर का सबसे बेहतर इलाज)
गठिया बाई का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi.
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गठिया बाई (अर्थराइटिस) का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi.

आर्थराइटिस के लिए अगर एलोपैथिक दवाई की बात की जाए तो केवल आपको दर्द निवारक दवाएं ही दी जाती हैं।
जो एक निश्चित समय तक आपको दर्द का आभास नहीं होने देती।
लेकिन आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें बहुत सारी अनेकों ऐसी दवाएं दी हैं जिनकी मदद से आप इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकते हो।
इसी संदर्भ में हम आपको गठिया के लिए 15 ऐसे आयुर्वेदिक और घरेलू इलाज बताने जा रहे हैं जिनका गठिया के लिए बहुत ही अच्छा परिणाम है।
यकीन मानिए इनके इस्तेमाल से सालों पुरानी गठिया को एक से डेढ़ महीने के अंदर आसानी से ठीक किया जा सकता है।
अतः इनमें से किसी भी नुस्खे का प्रयोग एक बार जरूर करें हमें पूरी उम्मीद है कि आपको मनचाहा परिणाम जरूर मिलेगा।

1. पारिजात से गठिया का उपचार -

गठिया के लिए पारिजात जिसे हम हरसिंगार के नाम से भी जानते हैं एक बहुत ही बेहतरीन आयुर्वेदिक दवा है।
आर्थराइटिस में इसके इतने अच्छे परिणाम हैं कि एक से डेढ़ महीने में गठिया या आर्थराइटिस का बड़ा से बड़ा मरीज अपने पैरों पर खड़ा होकर बिना किसी परेशानी के भागदौड़ कर सकता है।
इसके लिए पारिजात के पत्तों की एक औषधि तैयार की जाती है।

क्या चाहिए -

  • 6 से 7 पारिजात के पत्ते
  • 1/2 चम्मच कालीमिर्च का पाउडर

कैसे बनाए -

इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले हरसिंगार या पारिजात के पत्तों को अच्छे से कूट पीस कर एक पेस्ट बनाए।
अब इस पेस्ट में कालीमिर्च का पाउडर और तीन गिलास पानी डालकर एक पेय बनाए और इसे गर्म करें।
जब यह पेय एक तिहाई रह जाए तब इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें।

कैसे इस्तेमाल करें -

इसका इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको निराहार होना जरूरी है।
बनाए गए पेय के सेवन के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
इसके लिए आप यह पेय रात को तैयार कर सकते हैं और इसका सेवन सुबह खाली पेट नियमित रूप से करते रहें।
1 महीने के लगातार सेवन से पुराने से पुराना गठिया आसानी से ठीक हो जाएगा।

2. तिल का तेल गठिया की देसी दवा -

गठिया या आर्थराइटिस के इलाज के लिए तिल के तेल की मदद से एक औषधीय तेल तैयार किया जाता है।
यह तेल वाकई में हर तरह के दर्द और हर तरह की आर्थराइटिस को जड़ से खत्म कर आपको उससे निजात दिलाएगा।

क्या चाहिए -

  • तिल का तेल 300 ग्राम
  • अजवाइन 15 ग्राम
  • सौंठ का पाउडर 20 ग्राम
  • आंक के पत्ते 6 से 8
  • अरंडी के पत्ते 4 से 6
  • मालकांगनी के बीज 30 से 40 ग्राम
  • लहसुन 60 से 70 ग्राम
  • निर्गुंडी 20 ग्राम
  • 250 ग्राम पानी

कैसे तैयार करें -

इस तेल को तैयार करने के लिए सबसे पहले आपको 300 ग्राम तिल के तेल में बताई गई मात्रा में लहसुन, अजवाइन, सौंठ का पाउडर, निर्गुंडी,मालकांगनी के बीज आदि को मिला देना है।
इसके बाद अरंडी और आंक के पत्तों का रस निकालकर इसमें मिक्स करलें।
अब इसे 2 से तीन दिन के लिए रखा रहने दें।
तीन दिन के बाद इसमें एक गिलास पानी डालकर हल्की आंच पर गर्म करें।
जब यह तेल 250 ग्राम की मात्रा में रह जाए तब इसे ठंडा करके छान लें।
(और पढ़ें : सफेद दाग का पक्का इलाज)

कैसे इस्तेमाल करें -

इसका इस्तेमाल करना बिल्कुल आसान है इसके लिए आपको जहां भी जिस भी जोड़ में गठिया की समस्या है वहां इस तेल की हल्के हाथों से मसाज करें।
नियमित रूप से मसाज करते रहें और मसाज के बाद नमक से अपने उस हिस्से की सिकाई जरूर करें।
इससे आपको बहुत जल्दी हर प्रकार की गठिया और हर प्रकार के दर्द व सूजन में आराम मिलेगा।

3. कटहल या कंटकारी से गठिया का आयुर्वेदिक इलाज -

कटेली में घुटनों के दर्द को जड़ से खत्म करने की क्षमता होती है।
यह इतनी असरदार होती है की आपकी पुरानी से पुरानी गठिया आसानी से ठीक हो जाएगी।
यह हमारे शरीर के जोड़ों में जमे हुए यूरिक अम्ल को धीरे धीरे गला कर निकाल देता है।
और व्यक्ति पहले की तरह अपने निजी कार्यों को आसानी से कर सकता है।
और फिर कभी इस गठिया रोग से परेशान नहीं होता, हमेशा के लिए इससे छुटकारा मिल जाता है।
इसे उपयोग में लेने के लिए आपको कई सारी बातों का ध्यान रखना होता है।
क्योंकि इसमें कंटकारी या कटेली के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत अधिक कांटेदार होते हैं।

विधि -

इसके पौधे को लेकर किसी औजार की सहायता से चार पांच पत्ते अलग करके इन्हे अच्छे से पीस लें, चाहो तो आप मिक्सी का भी इस्तेमाल कर सकते हो।
इन्हे पीस कर गाड़ा पेस्ट बनाए साथ ही 10-12 काली मिर्च पीस कर पाउडर बना लें, या फिर इन दोनों को आप एक साथ पीस सकते हो।
इसके बाद आपको इस पेस्ट में पानी डालकर हल्का करना है। ताकि इसे किसी छलनी की सहायता से छाना जा सके।
इसे छानने के के बाद तक़रीबन आधा कप की मात्रा में ज्यूस बनता है, यही आपकी दवा है।
इसका उपयोग आपको दिन में सिर्फ एक बार करना है जो कि सुबह के समय खाली पेट उत्तम होता है।
इसके उपयोग के करीब एक घंटे बाद तक आपको निराहार रहना होगा।
और न ही किसी भी प्रकार की चिकनाई वाली वस्तुओं का सेवन करना है। इस तरह के खाने से हमेशा दूरी बनाए रखे।
ताकि यूरिक अम्ल के जमाव को जोड़ों में से जल्द से जल्द हटाया जा सके और गठिया को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके।

4. बबूल की फली से गठिया का अचूक इलाज -

गठिया लिए कई सारे बेहतरीन और अचूक आयुर्वेदिक इलाज हैं।
जिनमें बबूल की फली भी अपनी अहम भूमिका अदा करती है।
इसका उपयोग करने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
यह एक सीधा सा नुस्खा है जो आर्थराइटिस को जड़ से ख़त्म करने की कमाल की क्षमता रखता है।

विधि -

इसका उपयोग करने के लिए आपको बबूल की फलियों की जरुरत होगी।
अगर आसपास बबूल का पेड़ ना हो या फलियों का सीजन ना हो तो आप पंसारी की दुकान से या आयुर्वेदिक स्टोर से इसका पाउडर भी ले सकते हैं।
लेकिन यदि पाउडर आप खुद तैयार करते हो तो यह ज्यादा फायदेमंद होता है।
जब आप इसका पाउडर तैयार कर लें तब शहद के साथ आप इसका इस्तेमाल करें।
सुबह और शाम खाली पेट यह ज्यादा फायदेमंद होता है।
यकीन मानिये यह पाउडर भी आर्थराइटिस का एक अचूक इलाज है, जो की बेहद आसान और सरल है।
(और पढ़ें : गोरा होने के असरदार उपाय)

5. गोखरू गठिया की आयुर्वेदिक दवा -

इसी तरह गोखरू का भी प्रयोग एक असरदार औसधि के रूप में आर्थराइटिस के लिए पुराने समय से ही किया जाता आ रहा है।
यह भी बेहद ही असरदार और अचूक उपाय है जो गठिया या आर्थराइटिस को जड़ से ख़त्म कर मरीज को आराम दिलाता है।
यह आपको मार्केट में पंसारी की दुकान पर भी मिल जायेगा और आयुर्वेदिक स्टोर से इसका तैयार पाउडर भी मिल जायेगा।

विधि -

इसका प्रयोग करने के लिए आपको गोखरू के फलों और जड़ों का उपयोग करना होता है।
इन्हे सुखाकर इसका पाउडर तैयार किया जाता है जिसे देसी गाय के कच्चे दूध के साथ पिया जाता है
अगर आप खा सकते हो तो इसे शहद के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हो।
इसे उपयोग में लेने के लिए भी खाली पेट सुबह और शाम का समय ही उचित होता है।
पाउडर की एक चम्मच मात्रा को किसी कटोरी में लेकर शहद के साथ भी खाया जा सकता है।
और एक चम्मच पाउडर की फांकी लेकर ऊपर से गाय का दूध भी पिया जा सकता है।
यह नुस्खा भी आर्थराइटिस के बेहतरीन नुस्खों में से एक है।
जिसका असर भी जल्दी होता है और आसानी से कोई भी इसका प्रयोग कर सकता है।

6. नारियल पानी से अर्थराइटिस का इलाज -

नारियल का तेल या पानी भी गठिया रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद और कारगर औषधि है।
इसके इस्तेमाल से आपके जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द में बहुत ही जल्दी आराम मिलता है।

क्या चाहिए -

  • 500 ग्राम नारियल पानी
  • 25 ग्राम सौंठ का पाउडर
  • 30 ग्राम अजवाइन
  • 10 ग्राम कालीमिर्च पाउडर

कैसे बनाए -

यह औषधि तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले नारियल पानी में बताई गई मात्रा में सौंठ, अजवाइन और कालीमिर्च पाउडर मिक्स कर देना है।
इसके बाद इसे हल्की आंच पर गर्म करें।
जब उबलकर यह एक तैलीय पदार्थ में बदल जाए, इसके बाद इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
ठंडा होने के बाद छान कर एक कांच के बर्तन में भर कर रख लें।

कैसे इस्तेमाल करें -

इसका इस्तेमाल आपको मसाज के रूप में सुबह शाम अपने जोड़ों पर करना है।
और मसाज के बाद अपने दर्द वाले हिस्से को किसी गर्म कपड़े की सहायता से जरूर बांध लें।
इससे आपके जोड़ों की सूजन, अकड़न और दर्द में तुरंत आराम मिलेगा।
(और पढ़ें : प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण)

7. जावित्री से करें गठिया बाई का उपचार -

अगर आपके जोड़ों में आर्थराइटिस के कारण दर्द और सूजन है तो उसमें राहत पाने के लिए जावित्री, तुलसी और सौंठ के मिश्रण का भी इस्तेमाल किया जाता है।
इनके मिश्रण के सेवन से आपकी सूजन और दर्द में तुरंत आराम मिलता है।

क्या चाहिए -

  • 1 से डेढ़ गिलास पानी
  • एक चुटकी जावित्री पाउडर
  • सौंठ का पाउडर एक चुटकी
  • 3 से 4 पत्ते तुलसी

कैसे बनाए -

सबसे पहले एक गिलास पानी में बताई गई औषधियों को इसी मात्रा में डाल कर अच्छे से मिलाकर गर्म करें।
जब यह उबलने लगे तब इसे ठंडा करके छान लें।

कैसे इस्तेमाल करें -

इसका इस्तेमाल आप खाली पेट कभी भी कर सकते हैं।
इसके अलावा आप जावित्री और सौंठ का चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हो।
यह भी आपके लिए वातनाशक के रूप में काम करेगा और आपको आर्थराइटिस से जुड़ी हर तरह की समस्या से निजात दिलाएगा।
गठिया बाई का बेस्ट अचूक इलाज | rheumatoid arthritis in hindi.
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8. गिलोय से पुरानी बाई का आयुर्वेदिक इलाज -

गठिया के मरीजों के लिए गिलोय का रस भी बेहद लाभकारी होता है।
इसके नियमित इस्तेमाल से डेढ़ से दो महीने की अवधि में आपकी गठिया पूरी तरह ठीक हो जाएगी और चलने फिरने में आपको किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी।
इसे तैयार करने के लिए आपको गिलोय के रस में एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस और एक चुटकी सौंठ और कालीमिर्च पाउडर डालकर पीना है।
ऐसा नियमित रूप से लगातार करते रहें यह आपको दर्द में राहत देता है और सूजन आदी को ठीक कर गठिया को पूरी तरह खत्म कर देता है।
(और पढ़ें : quickly height badhane Ka Tarika)

9. मुलेठी अर्थराइटिस की देसी दवा -

गठिया के लिए मुलेठी का काढ़ा या चाय भी बेहद फायदेमंद है।
इससे आपके जोड़ों की अकड़न ठीक होती है और आर्थराइटिस को पूरी तरह खत्म करने में बहुत अधिक मदद मिलती है।
आप चाहो तो इसकी चाय बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हो।
इसके अलावा मुलेठी के पाउडर को शहद के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
मुलेठी एक वातनाशक के रूप में काम करती है जो आपकी आर्थराइटिस से जुड़ी हर समस्या के लिए बहुत ही अच्छी दवा हो सकती है।

10. पुनर्नवा और निर्गुंडी से करें अर्थराइटिस का उपचार -

पुनर्नवा और निर्गुंडी का मिश्रण गठिया के मरीजों के लिए एक रामबाण औषधि की भांति काम करता है।
इस औषधि के लगातार सेवन से आपको बहुत ही कम समय बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे।
यह दावा पूरी तरह वात नाशक है जो हर तरह की गठिया को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है।

क्या चाइए -

  • पुनर्नवा के 10 से 12 पत्ते
  • निर्गुंडी के 6 से 7 पत्ते
  • 5 से 6 पारिजात के पत्ते
  • तुलसी 4 से 5 पत्ते
  • कालीमिर्च 5 से 6

कैसे तैयार करें -

इसे तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले बताई गई चीजों को इसी मात्रा में लेकर अच्छे से कूट लेना है।
इसके लिए आप लकड़ी या पत्थर की खरल का इस्तेमाल करें।
अब जब यह एक महीन पेस्ट बन जाए तो इसमें दो गिलास पानी डालकर गरम करना है।
जब यह पानी आधी मात्रा में रह जाए तो इसे ठंडा करके छान लें।

कैसे इस्तेमाल करें -

इसका इस्तेमाल आपको सुबह खाने से 1 से डेढ़ घंटे पहले करना है।
आर्थराइटिस को खत्म करने के लिए यह बहुत ही प्रभावी दवा है।
इसे आप नियमित रूप से दो महीने तक जरूर इस्तेमाल करें।
इसके इस्तेमाल से शुरुआती दिनों में ही आपको दर्द और सूजन में राहत मिलने लगेगी।
(और पढ़ें : डायबिटीज़ का आसन और पक्का इलाज)

11. गूग्गल से गठिया का इलाज पतंजलि -

कहा जाता है कि गूग्गल मौत को छोड़कर हर प्रकार की बीमारी का इलाज है।
गठिया के लिए आप गूग्गल का इस्तेमाल शहद के साथ या पानी के साथ कर सकते हो।
इसके लिए शुद्ध गूग्गल की एक ग्राम मात्रा का इस्तेमाल सुबह शाम शहद या पानी के साथ करें।
इससे आपको आर्थराइटिस में बहुत अधिक फायदा मिलेगा, यहां तक कि आठ से दस दिन में ही आपको इसका असर देखने को मिल जाएगा।

12. बोसवेलिया (शाल्लकी) गठिया की रामबाण दवा -

शाल्लकी गोंद का इस्तेमाल भी आयुर्वेद में पुराने समय से ही किया जाता आ रहा है।
इसे अनेकों रोगों में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में इस्तेमाल करने के अलावा आर्थराइटिस के लिए एक रामबाण औषधि माना जाता है।
नियमित रूप से बोसवेलिया की छाल से निकले द्रव या गोंद का दिन में 2 से 3 बार 10 ग्राम की मात्रा में इस्तेमाल करें।
गठिया के मरीजों में इसके भी बहुत अच्छे परिणाम देखें गए हैं।

13. गाय का दूध से वात रोग का इलाज -

आर्थराइटिस या गठिया के मरीजों के लिए एक और बहुत ही चमत्कारी और अचूक दवा है।
जो महीने भर में गठिया रोगियों को उनकी इस समस्या से छुटकारा दिलाकर पूरी तरह स्वस्थ बना देती है।

क्या चाहिए -

  • 200 ग्राम मिश्री
  • अरंडी के बीजों का गुदा 250 ग्राम
  • 1 किलो गाय का दूध

कैसे तैयार करें -

इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले आपको एक किलो गाय के दूध को गर्म करके मावा बना लेना है।
इसके बाद इसमें बताई गई मात्रा में मिश्री और अरंडी के बीजों का गुदा डालकर एक हलवा तैयार कर लेना है।

कैसे इस्तेमाल करें -

इसका इस्तेमाल आपको सुबह शाम खाली पेट एक चम्मच की मात्रा में करना है।
यकीन मानिए यह दवा हर प्रकार के दर्द और गठिया में होने वाली सभी समस्याओं के लिए एक अचूक औषधि है।
नियमित रूप से एक से डेढ़ महीना इसका इस्तेमाल जरूर करें।
(और पढ़ें : कमर दर्द का सबसे बेस्ट इलाज)


14. अमलतास से बाई का घरेलू इलाज -

अमलतास की फलियों का इस्तेमाल भी पुराने समय से ही गठिया रोगियों के लिए किया जाता आ रहा है।
आर्थराइटिस में इसके भी बहुत अच्छे परिणाम देखें गए हैं।
गठिया की समस्या को जड़ से खत्म करने के साथ साथ यह अनेकों तरह की समस्याओं में भी बहुत अधिक लाभदायक है।

क्या चाहिए -

  • अमलतास की फली का पाउडर
  • एक गिलास पानी

कैसे तैयार करें -

इसे तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले रात को सोते समय एक गिलास पानी में एक से डेढ़ चम्मच अमलतास की फलियों के पाउडर को भिगो कर रख देना है।
सुबह खाली पेट इसको अच्छे से घोट कर पिएं।
इसके साथ ही आप इस पाउडर को शहद के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हो।
दोनों ही तरह यह आपकी गठिया को खत्म करने के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होगा।

15. पीपल की जड़ से गठिया रोग का उपचार -

गठिया या आर्थराइटिस के इलाज के लिए पीपल भी एक बहुत अच्छी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
अगर आप सामान्य घुटनों के दर्द या आर्थराइटिस की समस्या से परेशान हो तो आपको इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

क्या चाहिए -

  • पीपल की जड़ 50 ग्राम
  • त्रिफला चूर्ण 30 ग्राम
  • सौंठ का पाउडर 20 ग्राम
  • शहद दो चम्मच

कैसे तैयार करें -

सबसे पहले आप पीपल की जड़ का चूर्ण बनाकर त्रिफला और सौंठ के पाउडर में मिक्स करलें।
इसके बाद इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा का इस्तेमाल नियमित रूप से शहद के साथ करें।
इससे आपको गठिया और जोड़ों के दर्द में बहुत अधिक फायदा मिलेगा।
इसके अलाव आप पीपल की छाल का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हो स्वाद के लिए इसमें मिश्री या शहद का इस्तेमाल करें।
यह भी आर्थराइटिस रोगियों के लिए बहुत अच्छी दवा मानी जाती है।

गठिया (arthritis) से बचाव - (prevention of arthritis in Hindi)

Arthritis से छुटकारा पाने के लिए इसके बचाव और सावधानियां भी काफी मदगार होती हैं।
इसके बचाव ध्यान में रख कर आप इस दर्दनाक बीमारी को आने से रोक सकते हो और पूरी तहर इससे छुटकारा भी पा सकते हो।
  1. बाजारू खाद्य पदार्थों का सेवन बहुत ही कम करें या कतई न करें। 
  2. जरुरत से ज्यादा आराम भी और इसके साथ और भी अनेक बिमारियों का घर है। 
  3. अपनी क्षमता से अधिक मेहनती या भागदौड़ वाले काम को अपनी आदत न बनाए। 
  4. खून साफ करने वाली औसधियाँ जैसे नीम के कच्चे लाल रंग के पत्ते, अदरक, शहद आदि का सेवन करते रहें। 
  5. समय पर खाना लें और समय पर सोए, नींद पूरी लें। 
  6. अपनी जीवनशैली में तरलता लाएं, हार्ड खाने की बजाय तरल चीजों को प्राथमिकता दें। 
  7. रोज दही के साथ चांवल के दाने के बराबर चुने का प्रयोग करें। 
  8. पानी को ऊपर मुंह करके सीधा पीने की बजाय गिलास से पियें। 
  9. नारंगी, संतरा और निम्बू आदि खट्टी चीजों रस या बिना चीनी वाले ज्यूस को अपनी डाइट में शामिल करें।

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